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मर्द को दर्द नहीं होता हैं

मर्द को दर्द नहीं होता हैं –
शायद इसलिए याद नहीं मुझे,
मैं कब एक लड़के से मर्द हो गया।
बस्तों का बोझ ढोते-ढोते,
मैं कब ग़म का बोझ अकेले ही ढो गया।।

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जीवन का उद्देश्य

जीवन का उद्देश्य लक्ष्य मेरा आसान नहीं,दो पल का यह काम नहीं। इसके बिना जीवन तो है, पर जीवन में कोई जान नहीं। यह लक्ष्य नहीं, एक सफर है, कठिन जिसकी अपनी हर डगर है। बाहर से भले ही थक जाऊँ,पर बाकी अब भी कसर है।

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प्रेरक प्रसंग

प्रेरक प्रसंग एक आदमी ने गुरुनानक जी से पूछा, “मैं इतना गरीब क्यों हूँ”? तो गुरुनानक जी ने कहा,“तुम गरीब हो क्योंकि तुमने देना नहीं सीखा।” यह सुनकर वह आदमी बोला, “मेरे पास तो देने के लिए कुछ भी नहीं है।” तो गुरुनानक जी

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प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार और वैश्विक मंच पर हिंदी की बढ़ती भूमिका

प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार और वैश्विक मंच पर हिंदी की बढ़ती भूमिका हिंदी भाषा आज केवल भाव-अभिव्यक्ति या साहित्य की भाषा नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार के अवसरों और वैश्विक संवाद का सशक्त माध्यम बन चुकी

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दृश्य संभावनाओं से भरा है

दृश्य संभावनाओं से भरा है दृश्य – 1 जंग लगी शिलाखंडों को तोड़ कर जब गलाया होगा लोहा पहली बार, तब संघर्षों की आदिम स्मृतियों को भी ढाल लिया गया होगा हथियारों को मज़बूत करने की प्रक्रिया में। तब बरछे-भालों के साथ ढले होंगे हल,

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Students of Navodaya

Students of Navodaya Students of Navodaya The rising stars and blooming flowers They enter in Navodaya with hesitation and fears Live here in a home that is far away from home Slowly

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KNOW YOURSELF

KNOW YOURSELF Why should you go far away Everything is in heart of hearts In your own conscience and beats Introspect yourself and pray. Don’t chase behind success Make yourself resilient

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दौलत दोस्ती की

दौलत दोस्ती की ज़िंदगी इससे गुलज़ार होती है, दोस्त सचमुच नमक की तरह होते हैं! ना हों तो ये बेजान-से, बगैर इनके हम लगते हैं। शख्सियत होती इनकी ऐसी, हर खुशी-ग़म बाँट लेते हैं! आज़माया कई बार इन्हें, बिन बोले ही हाल हमारे अंदर

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मायने ज़िंदगी के

मायने ज़िंदगी के बंद मुट्ठी से, रेत की मानिंद, फिसलती जाती हो, ज़िंदगी! बीतती चली जाती हो, ज़िंदगी! ये माना, रास्ता हो तुम,तो ये मोड़ आते-जाते रहेंगेऔर हमें चलना भी सिखाते रहेंगे। किसी मोड़ पर पर्वत, तो कहीं खाई होगी, गुज़र

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