Author name: JNV Blogs

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दौलत दोस्ती की

दौलत दोस्ती की ज़िंदगी इससे गुलज़ार होती है, दोस्त सचमुच नमक की तरह होते हैं! ना हों तो ये बेजान-से, बगैर इनके हम लगते हैं। शख्सियत होती इनकी ऐसी, हर खुशी-ग़म बाँट लेते हैं! आज़माया कई बार इन्हें, बिन बोले ही हाल हमारे अंदर

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मायने ज़िंदगी के

मायने ज़िंदगी के बंद मुट्ठी से, रेत की मानिंद, फिसलती जाती हो, ज़िंदगी! बीतती चली जाती हो, ज़िंदगी! ये माना, रास्ता हो तुम,तो ये मोड़ आते-जाते रहेंगेऔर हमें चलना भी सिखाते रहेंगे। किसी मोड़ पर पर्वत, तो कहीं खाई होगी, गुज़र

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वर्तमान सामाजिक परिवेश में युवा

वर्तमान सामाजिक परिवेश में युवा वर्तमान सामाजिक परिवेश तीव्र परिवर्तन का दौर है। विज्ञान, तकनीक, वैश्वीकरण और सूचना क्रांति ने समाज की संरचना, सोच और जीवन-शैली को गहराई से प्रभावित किया है। इस परिवर्तन के केंद्र में

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अभी बहुत कुछ बाकी है

अभी बहुत कुछ बाकी है ऊँची उड़ान भरना अभी बाकी है, खुद को साबित करना अभी बाकी है।“ मैं कर सकती हूँ” से “मैंने कर लिया” तक का सफ़र अभी बाकी है। खुशियों की चाबी से ग़म की बेड़ियाँ तोड़ना अभी बाकी है, अपनी कई

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खुद को खोजती ज़िन्दगी

खुद को खोजती ज़िन्दगी तू किसी के लिए आधी तो किसी के लिए पूरी है।पर सच कहूँ, तू जो है, जैसी है, खुद के लिए काफ़ी है। हाँ, होंगी कमियाँ हज़ार तुझमें, पर साथ उनके जीना तुझे आता है। खुद के आँसू पोंछकर मुस्कुराना तुझे आता है। अपने सपनों को

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मूक अपराधी (अरावली)

मूक अपराधी (अरावली) ये पहाड़ सदियों से खड़े थे।ये न चुनाव लड़े, न बहस में पड़े थे। बस रोकते रहे बढ़ता रेगिस्तान, जमा करते रहे पानी, साफ़ करते रहे हवाऔर चुपचाप कटते रहे। क्या यही इनकी सबसे बड़ी गलती थी? इस दौर में

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Monument

My soul is like a wall of monument It is old due to its experience of all seasons It has seen many ages The fall and dawn Selfless and selfish Exploiters and nurturer Some made it Some

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छोटी सी ज़िन्दगी

छोटी सी ज़िन्दगी छोटी सी ज़िंदगी इस छोटी सी ज़िंदगी में बहुत चीज़ों से खेला है।आज मैं तुम्हें बताऊँ कि मैंने क्या-क्या देखा है। धूप में बदन को जलते,तो आत्माओं को झुलसते हुए भी देखा है। उन नन्हे हाथों को भीख माँगते,तो उन शहज़ादों को

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