Mamta Sahu
JSA
जीवन का उद्देश्य
लक्ष्य मेरा आसान नहीं,
दो पल का यह काम नहीं।
इसके बिना जीवन तो है, पर जीवन में कोई जान नहीं।
यह लक्ष्य नहीं,
एक सफर है, कठिन जिसकी अपनी हर डगर है।
बाहर से भले ही थक जाऊँ,
पर बाकी अब भी कसर है।
कभी-कभी डर जाती हूँ,
कदम बढ़ाकर रुक जाती हूँ,
पर कुछ करना है, यह याद करके आगे फिर बंध जाती हूँ।
कई बार नीचे गिरूँगी,
न डरूँगी, न रुकूँगी।
जो ठाना है, उसे पाकर ही रहूँगी।
लक्ष्य मेरा है,
मैं इस तक पहुँचकर रहूँगी।
