खुद को खोजती ज़िन्दगी

Megha Furli

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खुद को खोजती ज़िन्दगी

तू किसी के लिए आधी तो किसी के लिए पूरी है।
पर सच कहूँ, तू जो है, जैसी है, खुद के लिए काफ़ी है।

हाँ, होंगी कमियाँ हज़ार तुझमें,
पर साथ उनके जीना तुझे आता है।
खुद के आँसू पोंछकर मुस्कुराना तुझे आता है।

अपने सपनों को बुनकर उन्हें सजाना तुझे आता है।
कहीं ठहरकर फिर से आगे बढ़ना तुझे आता है।

इसलिए तो कहती हूँ,
ज़िंदगी तेरी है और इसे जीना तुझे आता है।

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