Krishna Kumar
Class 9 (B)
बाप
जब एक बाप
अपने बेटे को चाहता है
तब वो सारी दुनिया के खिलाफ भी हो सकता है,
ये बात है
जब मैं संशयपाली के मॉल मे गया
वहाँ मैंने एक अद्धुशनीय घटना देखी
जब एक बाप
अपने 9 माह के बच्चे को लेकर
सीढ़ी चढ़ रहा था
तब वो अपने बच्चे को देखकर
बहुत खुश हो रहा था
जब वो सीढ़ी चढ़ ही रहा था
कि एक वृद्ध व्यक्ति
सीढ़ी उतर रहा था
तब उसने देखा
कि जो वृद्ध व्यक्ति है
वो अपना संतुलन खो रहे है
तो उसने हाथ बढ़ाया
वृद्ध को हाथ देने के भ्रम में
वह ये भूल गया
कि उसके हाथ मे
उसके 9 माह का बच्चा है
जैसे ही घटना घटी
तब उसके हाथ से
वो 9 माह का बच्चा
छूट गया।
उसने नीचे देखा
उसका बेटा गिर रहा था
वो चाह कर भी
कुछ न कर पाया
जब वह आखिरखार
नीचे गिरा
लगभग 2 व-3 मंजिल से
उसने पाया
उसका बेटा अब नहीं रहा
तो अपने आप को
संभाल नहीं पाया
उसने यह भ्रम पैदा कर लिया
कि उसका बेटा कुछ कह रहा है,
“पापा, मैं आपके पास ही हूँ
हमेशा
मुझे पता है
आप मुझसे बहुत प्यार करते हैं
पर वृद्ध व्यिक्त को भी बचाना था,
पापा मैं तो आपके पास रहूँगा
पापा मैं जा रहा हूँ,
मैं जा रहा हूँ”
ऐसा कहकर
बच्चों चले जाता
उस व्यिक्त का भ्रम टूट हो जाता
तब उसने
अपने बेटे के चाह में
खुद उस जगह से कूद गया
आज भी मैं
जब उस व्यिक्त और बच्चे को याद करता हूँ
तो मुझे बस
मुझे बस
“मैं जा रहा हूँ”
शब्द याद आते हैं।
