Bharti Vishal
Class 9 (B)
बाहर निकल के तो देखो
जीवन के इस वणर्न सफर में
धूल को उड़ा के देखो
खुिशयों के आसमान में
पंछी बन उड़ के देखो
माँ के आँखों से निकलते
मोतियों को
धागे में पिरोकर देखो
पिता के उम्मीदों के पहाड़ में
सफलता का झंडा
लहराकर देखो
टहनी में उलझे फूलों का
भँवरा बन
रस पी के देखो
पिरवार के छोटी-छोटी खुिशयों का
आधार बन के देखो
शिक्षक के पुस्तकों का
लिखा हुआ पन्ना
बनके देखो
बुजुगोर्ं के टेढ़े-मेढ़े िनयमों का
प्यारी-प्यारी पालन
कर के देखो
ईश्वरों के बीच
भेदभाव छोड़
सच्चे मन से
ज़रा मिस्जद जाके देखो
मोह-माया के जाल से
भेद-भाव के पितरो से
झाँगे-उपभोग के अंधेरों से
नफरत भरे पिंजरों से
बाहर निकलके तो देखो
बाहर निकलके तो देखो।
