एक लड़ाई जो थी मेरे विरूद्ध

Labanya Tandi

Class 9 (A)

एक लड़ाई जो थी मेरे विरूद्ध

वे सब मिलकर
इकट्ठा होते हैं,
और छिपकर बैठते
मेरे कदमों को
देखते हैं,
क्या वे बुराई करके
बच जाएँगे ?
मन में लड़ाई थी,
लेिकन
नंगी तलवारें थी उनकी।
लड़ाई मेरे विरुद्ध
मची थी बहुत
को संग लेकर
मेरा सामना किया था,
जिनमे कोई परिवर्तन
ही नहीं था।
मेरे मेल रखने वाले
पर भी हाथ छोड़ा था उसने
उसने ही वचन
तोड़ डाला था,
जिनमे परिवर्तन
ही नहीं था कोई।
मुँह की बातें
जो मक्खन सी
चिकनी थी उसकी,
उसे भी
मेरे जवान सिंह के
दाड़ों ने
डाला था उताड़।
जैसे कुत्ता
अपनी छाँट चाटता है।
वैसे उसने भी
अपनी मुखर्ता
दोहराया था,
शायद समझ नहीं थी उसमे,
जैसे विरूद्ध था वो
मेरे मानो
हथौड़ा और तलवार
और पैना तीर है।
लेिकन,
बदिकस्मत से
टूटे हुए दाँत
और उखड़े पाँव के
समान हैं।
शायद इसी ही प्रकार
था वो विरूद्ध मेरे
उसे लगता था
शायद चाँदी के कोड़ों पर
सोने का मेब है
लेकिन पता नहीं था उसे,
मेरे कोमल वचन के बारे में
जो चीरते चली गई इसे।

ऐसे थे वो विरूद्ध मेरे।

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