Neeta Thwait
TGT Science
दौलत दोस्ती की
ज़िंदगी इससे गुलज़ार होती है,
दोस्त सचमुच नमक की तरह होते हैं!
ना हों तो ये बेजान-से,
बगैर इनके हम लगते हैं।
शख्सियत होती इनकी ऐसी,
हर खुशी-ग़म बाँट लेते हैं!
आज़माया कई बार इन्हें,
बिन बोले ही हाल हमारे अंदर का जान लेते हैं।
चाहे जितनी भी दूर चले जाएँ,
इनके बीच फिर तार बेतार के होते हैं।
दिल से जो कभी याद कर ले इन्हें,
“तुम ठीक हो ना?” — तुरंत फ़ोन ये करते हैं।
मन से मन के इस संवाद को
विज्ञान ‘टेलीपैथी’ कहता है।
नहीं इससे बड़ी दौलत कोई दुनिया में,
ऊपर सारे रिश्तों से इन्हें हम रखते हैं।
