Vinay Kumar Pandey
TGT Hindi
मूक अपराधी (अरावली)
ये पहाड़ सदियों से खड़े थे।
ये न चुनाव लड़े, न बहस में पड़े थे।
बस रोकते रहे बढ़ता रेगिस्तान,
जमा करते रहे पानी, साफ़ करते रहे हवा
और चुपचाप कटते रहे।
क्या यही इनकी सबसे बड़ी गलती थी?
इस दौर में जो चुप रहता है,
वह कटता है, वही ढहता है
और फिर परिभाषा के बाहर कर दिया जाता है।
इन्हें बता दिया जाता है कि
हर ऊँचाई पहाड़ नहीं होती
और सैकड़ों के नीचे कोई ऊँचाई नहीं होती।
तुम गलतफ़हमी में हो कि तुम हो पहाड़,
तुम्हें दिया जाएगा जड़ से उखाड़।
तुम हो नहीं भूगोल,
तुम कानून की तकनीकी गड़बड़ी हो।
तुम इस सिस्टम की सबसे बड़ी किरकिरी हो।
देखकर तुमको फिर सिस्टम ने कहा कि
कैसे ये हमसे बचा रह गया?
अब सवाल ये नहीं कि क्यों कट रही,
अब सवाल ये है कि
अरावली इतने साल बच कैसे गई।
