नवोदय

Prachi Sahu

Class 11 (A)

नवोदय

नवोदय तू कितना महान है।
तेरे आँगन में
न जाने कितने फूल खिले हैं
और खिलते रहेंगे।

तुमने सबको बड़े प्यार से सींचा,
तू कितना सहनशील है।

आँधी आई,
तूफान आया,
पर तुमने
अपना अंकुश न खोया।

सोचकर तो आए थे सब यहाँ
कि है ये किसी कैदी का घर,
पर
जब जाने की बारी आई,
बावली आँखें प्यासी होने लगीं,
आँसुओं का तार न टूटा।

तुमने ऐसा जादू डाला,
नवोदय तू कितना महान है।

आए थे सब खाली हाथ,
लेकर गए सब तेरा आशीर्वाद।

महान हैं ये तेरे चार रंग,
तभी तो कहलाते हैं
ये नवोदयन!

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top